दीवाली 2026: दीपावली की तारीख, समय, इतिहास और पूजा का समय: भारत में मनाए जाने वाले सभी त्योहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक, दोनों ही नज़रिए से बहुत महत्व है। इसे दीपावली, दिवाली या दीपोत्सव भी कहा जाता है। ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ का अर्थ है – (हे प्रभु!) मुझे अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलें। यह उपनिषदों का संदेश है। इसे सिख, बौद्ध और जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं। जैन धर्म के लोग इसे भगवान महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं और सिख समुदाय इसे ‘बंदी छोड़ दिवस’ के रूप में मनाता है।
दिवाली 2026 कब है?
इस साल दिवाली गुरुवार, 4 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी।
दिवाली हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह कार्तिक माह का 15वां दिन होता है।
अमावस्या तिथि:
शुरुआत — 4 नवंबर 2026, सुबह 6:03 बजे समाप्ति — 5 नवंबर 2026, रात 2:44 बजे
दिवाली 2026 — लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
दिवाली की पूजा का सबसे शुभ समय प्रदोष काल में होता है — यानी सूर्यास्त के बाद का वक्त।
| पूजा | शुभ मुहूर्त |
|---|---|
| लक्ष्मी पूजा मुहूर्त | शाम 6:09 बजे से रात 8:04 बजे तक |
| प्रदोष काल | शाम 5:34 बजे से रात 8:10 बजे तक |
| पूजा की कुल अवधि | लगभग 1 घंटा 55 मिनट |
दिवाली 2026 — 5 दिनों का पूरा कार्यक्रम
दिवाली सिर्फ एक दिन का त्योहार नहीं है — यह 5 दिनों का महापर्व है। हर दिन का अपना अलग महत्व और परंपरा है।
🏺 पहला दिन — धनतेरस: 2 नवंबर 2026 (मंगलवार)
दिवाली पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस दिन लोग घर की साफ-सफाई पूरी करते हैं और शुभ खरीदारी के लिए बाजार जाते हैं। मान्यता है कि धनतेरस पर सोना, चाँदी, बर्तन या कोई नई वस्तु खरीदना बेहद शुभ होता है।
इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि, जिन्हें आरोग्य और स्वास्थ्य का देवता माना जाता है, की पूजा की जाती है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस के दिन खरीदी गई वस्तु में कई गुना वृद्धि होती है।
परंपरा के अनुसार, शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाया जाता है और माता लक्ष्मी के स्वागत की तैयारी की जाती है।
🪔 दूसरा दिन — छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी): 3 नवंबर 2026 (बुधवार)
छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी या रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन दिवाली पर्व का दूसरा महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।
इस दिन सुबह जल्दी उठकर तेल मालिश और स्नान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था और उसकी कैद में बंद 16,000 कन्याओं को मुक्त कराया था।
इसी विजय और खुशियों के प्रतीक के रूप में लोग दीये जलाते हैं। शाम के समय घरों को दीपों की रोशनी से सजाया जाता है और सुंदर रंगोली बनाई जाती है।
✨ तीसरा दिन — दिवाली (मुख्य पर्व): 4 नवंबर 2026 (गुरुवार)
दिवाली का मुख्य पर्व वही दिन होता है, जिसका पूरे साल बेसब्री से इंतज़ार किया जाता है। अमावस्या की अंधेरी रात को दीयों की रोशनी से सजाना ही इस त्योहार की सबसे सुंदर पहचान है।
इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। घरों को फूलों, दीपों और रंगोली से सजाया जाता है। परिवार के सभी सदस्य एक साथ मिलकर पूजा करते हैं, प्रसाद और मिठाइयाँ बाँटते हैं तथा उत्सव का आनंद लेते हैं।
पूजा के लिए आवश्यक सामग्री:
लाल कपड़ा, माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर, भगवान गणेश की प्रतिमा, फूल, फल (सिंघाड़ा, अनार, श्रीफल), मिठाई, दीपक, अगरबत्ती और कलश।
💑 चौथा दिन — गोवर्धन पूजा / पड़वा: 5 नवंबर 2026 (शुक्रवार)
इस दिन को पड़वा या अन्नकूट भी कहते हैं।
पति-पत्नी के प्रेम का यह विशेष दिन है। पति अपनी पत्नी को उपहार देते हैं। साथ ही व्यापारी इस दिन नया बहीखाता खोलते हैं — यह बिजनेस के लिए शुभ दिन माना जाता है।
गोवर्धन पूजा में भगवान श्रीकृष्ण के उस दिन की याद में पूजा की जाती है जब उन्होंने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की इंद्र के कोप से रक्षा की थी।
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👫 पाँचवाँ दिन — भाई दूज: 6 नवंबर 2026 (शनिवार)
भाईदूज दिवाली पर्व का अंतिम और बेहद भावनात्मक दिन माना जाता है। यह दिन भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और अटूट रिश्ते को समर्पित होता है।
इस अवसर पर बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं और उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि तथा उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहनों को उपहार देकर उनके प्रति अपने प्रेम और सम्मान को व्यक्त करते हैं।
रक्षाबंधन की तरह ही भाईदूज भी भाई-बहन के अटूट बंधन, अपनापन और पारिवारिक स्नेह का सुंदर उत्सव है।
दिवाली का इतिहास — यह परंपरा कहाँ से शुरू हुई?
दिवाली से जुड़ी सबसे लोकप्रिय कथा रामायण से मिलती है। मान्यता है कि जब भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा करके, रावण का वध कर और माता सीता को वापस लेकर अयोध्या लौटे, तब अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका भव्य स्वागत किया। कार्तिक अमावस्या की अंधेरी रात दीपों की रोशनी से जगमगा उठी, और तभी से दीपावली प्रकाश, उल्लास और विजय के पर्व के रूप में मनाई जाने लगी।
हालाँकि, दिवाली का महत्व केवल रामायण तक सीमित नहीं है। भारत की विविध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में इस पर्व को अलग-अलग मान्यताओं के साथ देखा जाता है।
जैन धर्म में यह दिन भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में माना जाता है।
सिख धर्म में इसी अवसर को बंदी छोड़ दिवस के रूप में याद किया जाता है, क्योंकि मान्यता है कि गुरु हरगोबिंद साहिब जी इसी दिन मुगल कैद से मुक्त होकर अमृतसर पहुँचे थे।
हिंदू मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी का प्रकट होना भी दीपावली से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रसंग माना जाता है, इसी कारण दिवाली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक भी है।
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा की सरल विधि
तैयारी: शाम को स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें और वहाँ लाल कपड़ा बिछाएँ।
पूजा सामग्री: माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर, फूल, फल, मिठाई, सिक्के, दीपक, अगरबत्ती, कुमकुम, चावल और कलश तैयार रखें।
पूजा विधि : सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें, फिर माता लक्ष्मी का पूजन करें। इसके बाद फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। दीपक जलाएँ, आरती करें और अंत में प्रसाद परिवार के सदस्यों में बाँट दें।
शुभ मुहूर्त में पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस वर्ष लक्ष्मी पूजा का उत्तम समय शाम 6:09 बजे से रात 8:04 बजे तक है।
दिवाली पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q: दिवाली 2026 में कब है?
दिवाली 2026 में 4 नवंबर 2026 (गुरुवार) को है।
Q: लक्ष्मी पूजा का सबसे शुभ समय क्या है?
4 नवंबर को शाम 6:09 बजे से रात 8:04 बजे तक — यह 1 घंटा 55 मिनट का शुभ मुहूर्त है।
Q: दिवाली क्यों मनाई जाती है?
मुख्य कारण यह है कि इसी दिन भगवान राम 14 साल का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे। अयोध्यावासियों ने दीये जलाकर उनका स्वागत किया था।
Q: दिवाली पर कौन से भगवान की पूजा होती है?
मुख्य रूप से माँ लक्ष्मी (धन-समृद्धि की देवी) और भगवान गणेश (शुभ कार्यों के देवता) की पूजा होती है।
Q: क्या दिवाली पर पटाखे जलाना ज़रूरी है?
नहीं। पटाखे जलाना एक cultural tradition है, लेकिन pollution और शोर को देखते हुए आजकल बहुत से लोग सिर्फ दीये जलाकर और मिठाई बाँटकर दिवाली मनाते हैं। Green Diwali का concept तेज़ी से popular हो रहा है।
Q: धनतेरस पर क्या खरीदना चाहिए?
सोना, चाँदी, बर्तन, या कोई भी नई चीज़ शुभ मानी जाती है। Electronics और वाहन भी इस दिन खरीदे जाते हैं।

