साल में एक दिन ऐसा आता है जब खरीदारी करना सिर्फ एक मनोरंजन नहीं, बल्कि एक पवित्र कार्य माना जाता है।
नए बर्तन घर की महिलाएं खरीदती हैं। दुकानदार नई किताबें बनाते हैं। कभी-कभी सोने-चाँदी की दुकानों में इतनी भीड़ होती है कि नंबर लेना पड़ता है।
जी हाँ—यह धनतेरस है।
इसी दिन दिवाली शुरू होता है। धनतेरस स्वास्थ्य, आयुर्वेद और जीवन की रक्षा के साथ-साथ धन और समृद्धि का भी पर्व है।
आज हम धनतेरस 2026 के बारे में पूरी जानकारी दे रहे हैं। धनतेरस की पुरानी कहानियाँ, तारीखें, मुहूर्त, पूजा विधि और क्या खरीदें और क्या नहीं।
धनतेरस 2026 कब है?
इस साल धनतेरस सोमवार, 2 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा।
धनतेरस हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है — यानी दिवाली से ठीक दो दिन पहले।
त्रयोदशी तिथि:
- शुरुआत — 2 नवंबर 2026, सुबह 11:31 बजे
- समाप्ति — 3 नवंबर 2026, सुबह 9:02 बजे
धनतेरस 2026 — पूजा का शुभ मुहूर्त
धनतेरस की पूजा शाम के समय की जाती है — जब दिन ढल रहा हो और दीयों की रोशनी अपना काम शुरू करे।
| पूजा | शुभ समय |
|---|---|
| धनतेरस पूजा मुहूर्त | शाम 6:17 बजे से रात 8:11 बजे तक |
| प्रदोष काल | शाम 5:35 बजे से रात 8:11 बजे तक |
| यम दीपम का समय | शाम 5:35 बजे से शाम 6:53 बजे तक |
| पूजा की कुल अवधि | लगभग 1 घंटा 54 मिनट |
ध्यान दें: ये timings उत्तर भारत के अनुसार हैं। अपने शहर का सटीक मुहूर्त जानने के लिए Drik Panchang पर अपना location डालकर देखें।
धनतेरस की उत्पत्ति— धनतेरस के पीछे की मार्मिक कहानी सबको पता होनी चाहिए।
राजा हिमा का पुत्र एक बहुत पुरानी कहानी है। हिमा नामक एक राजा था। उसकी कुंडली में लिखा था कि वह साँप के काटने से विवाह के चौथे दिन मर जाएगी।
पुत्र की नवविवाहित शादी हुई थी। पत्नी बहुत बुद्धिमान और भावुक थी। वह भयभीत नहीं हुआ जब उसे यह पता चला— उन्होंने सोचा।
उस रात यमराज ने साँप की तरह आकर दरवाजे पर सोने-चाँदी के सिक्के और गहनों का ढेर लगाया था। इतने दीये घर भर में जल रहे थे कि रात भी दिन की तरह लगती थी।
उस प्रकाश में यमराज नहीं घुस पाया। वे सिर्फ दरवाजे पर रुक गए। यमराज को रात भर नींद नहीं आती थी क्योंकि नवविवाहित पत्नी गाती-सुनाती रही।
यमराज को भोर होते-होते वापस जाना पड़ा। उस दिन से माना जाता है कि धनतेरस पर दीये जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और यमराज के नाम का दीया जलाया जाता है।
🏺 भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य
धनतेरस की दूसरी और उतनी ही महत्वपूर्ण कहानी है भगवान धन्वंतरि की।
जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया — तो उसमें से अनेक चीज़ें निकलीं। उन्हीं में से एक थे भगवान धन्वंतरि — जो अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए।
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का देवता माना जाता है। उन्होंने संसार को रोगों से मुक्ति का रास्ता बताया। इसीलिए धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने धनतेरस को आधिकारिक रूप से National Ayurveda Day घोषित किया है।
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धनतेरस पर किन देवताओं की पूजा होती है?
धनतेरस पर चार देवताओं की पूजा का विशेष महत्व है:
| देवता | क्यों पूजते हैं |
|---|---|
| माँ लक्ष्मी | धन, समृद्धि और सुख के लिए |
| भगवान धन्वंतरि | स्वास्थ्य और आरोग्य के लिए |
| कुबेर देव | संपत्ति की रक्षा के लिए |
| यमराज | अकाल मृत्यु के भय को दूर करने के लिए |
धनतेरस पूजा विधि — step by step
तैयारी पहले करें:
शाम को स्नान करें। साफ वस्त्र पहनें। पूजा की जगह को गंगाजल से शुद्ध करें।
पूजा सामग्री:
लाल कपड़ा, धान (साबुत चावल), कलश, आम के पत्ते, माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की मूर्ति या तस्वीर, गणेश जी, सिक्के, फूल, फल, मिठाई, खीर, दीये, अगरबत्ती, कुमकुम, चंदन, तुलसी के पत्ते।
पूजा का क्रम:
Step 1 — कलश स्थापना: लाल कपड़े पर धान रखें, उस पर कलश रखें। कलश में तीन-चौथाई पानी भरें, थोड़ा गंगाजल मिलाएं। उसमें फूल, अक्षत, सिक्का और सुपारी डालें। ऊपर आम के पत्ते रखें।
Step 2 — माँ लक्ष्मी स्थापना: धान पर हल्दी से कमल का फूल बनाएं और माँ लक्ष्मी की मूर्ति वहाँ रखें। कलश के दाईं तरफ गणेश जी को स्थापित करें।
Step 3 — पूजन: चंदन, सिंदूर, अबीर, गुलाल, फूल, फल, खीर अर्पित करें। माँ लक्ष्मी के मंत्रों का उच्चारण करें।
मंत्र:
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः
Step 4 — भगवान धन्वंतरि की पूजा: उन्हें खीर, श्रीफल और दक्षिणा अर्पित करें। कपूर से आरती करें।
Step 5 — यम दीपम: शाम को घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यमराज के नाम का दीया जलाएं। यह परिवार को अकाल मृत्यु से बचाता है — ऐसी मान्यता है।
Step 6 — प्रसाद वितरण: पूजा समाप्त होने के बाद खीर और मिठाई परिवार में बाँटें।
धनतेरस पर क्या खरीदें — और क्या न खरीदें?
✅ धनतेरस पर यह खरीदना शुभ माना जाता है:
सोना और चाँदी — सबसे पहला और सबसे शुभ। सोने के सिक्के, चाँदी की मूर्ति, गहने — सब शुभ हैं।
नए बर्तन — पीतल, काँसा, स्टील, चाँदी के बर्तन खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है।
झाड़ू — थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदना शुभ होता है। कहते हैं इससे घर से दरिद्रता दूर होती है। खरीदने के बाद झाड़ू को घर में उल्टा रखें।
धनिया के बीज — कुछ घरों में धनिया के बीज खरीदने की परंपरा है। इसे घर में रखा जाता है और अगले साल बोया जाता है।
Electronics और Gadgets — आधुनिक ज़माने में लोग इस दिन TV, Phone, Laptop, Refrigerator आदि भी खरीदते हैं।
वाहन — कार या दोपहिया वाहन खरीदना भी इस दिन शुभ माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q: धनतेरस 2026 में कब है?
धनतेरस 2026 में 2 नवंबर 2026, सोमवार को है।
Q: धनतेरस पर पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
शाम 6:17 बजे से रात 8:11 बजे तक — यह 1 घंटा 54 मिनट का शुभ मुहूर्त है।
Q: धनतेरस पर सोना खरीदना क्यों शुभ माना जाता है?
मान्यता है कि इस दिन खरीदा गया सोना-चाँदी 13 गुना बढ़ता है। साथ ही यह घर में माँ लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक भी है।
Q: क्या धनतेरस पर बर्तन खरीदना ज़रूरी है?
ज़रूरी नहीं, लेकिन परंपरागत रूप से यह बहुत शुभ माना जाता है। पीतल, काँसा या स्टील के बर्तन खरीद सकते हैं।
Q: धनतेरस और दिवाली में क्या फर्क है?
धनतेरस दिवाली का पहला दिन है — यह मुख्य रूप से भगवान धन्वंतरि और माँ लक्ष्मी के स्वागत का दिन है। दिवाली (अमावस्या) दो दिन बाद आती है जब लक्ष्मी-गणेश की मुख्य पूजा होती है।
Q: यम दीपम क्या होता है?
धनतेरस की शाम दक्षिण दिशा की ओर यमराज के नाम से दिया जलाना — इसे यम दीपम कहते हैं। यह परिवार को अकाल मृत्यु से बचाने के लिए किया जाता है।
मुख्य बात यह है कि धनतेरस सिर्फ खरीददारी का दिन नहीं है।
यह याद दिलाता है कि जीवन में दो सबसे महत्वपूर्ण चीज़ें हैं: धन और स्वास्थ्य। माँ लक्ष्मी समृद्धि प्रदान करती है, और भगवान धन्वंतरि स्वस्थ रहते हैं।
इस धनतेरस पर खरीदारी करना ज़रूरी है, लेकिन याद रखें कि माँ लक्ष्मी का आगमन सिर्फ मेहनत, प्रेम और सकारात्मकता से होता है।
धनतेरस 2026 को सभी को शुभकामनाएँ! ‘
